Table of Contents (TOC)
- 1. इलायची क्या है?
- 2. इलायची का English नाम क्या है?
- 3. इलायची के प्रमुख प्रकार
- 4. छोटी इलायची (Green Cardamom) क्या है?
- 5. बड़ी इलायची (Black Cardamom) क्या है?
- 6. छोटी और बड़ी इलायची में अंतर
- 7. निष्कर्ष
- 8. आयुर्वेद में इलायची का महत्व
- 9. भोजन और पेय पदार्थों में उपयोग
- 10. इलायची के प्रमुख गुण और कर्म
- 11. इलायची का उपयोग किन समस्याओं में किया जाता है?
- 12. इलायची की तासीर गरम है या ठंडी?
- 13. रात को सोने से पहले इलायची खाने के फायदे
- 14. असली और नकली इलायची की पहचान
- 15. इलायची इतनी महंगी क्यों है?
- 16. इलायची से जुड़े महत्वपूर्ण MCQ
- 17. One Liner Important Elachi
इलायची क्या है?
Written by Ayurved Study Hub Team | Reviewed by Our Ayurveda Expert Panel
Hamare sabhi lekh hamari expert team dwara likhe aur janche jate hain taaki aapko sahi aur puri jankari mile. Ye jankari keval shiksha ke liye hai
इलायची एक ऐसा सुगंधित मसाला है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में एवं भोजन और पेय पदार्थों में स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। इसे अंग्रेजी में कार्डेमोम कहा जाता है। इलायची मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी गई है—एक तो छोटी इलायची, दूसरी बड़ी इलायची।
इलायची का English नाम क्या है? (elaichi in english)
इलायची को अंग्रेजी में Cardamom (कार्डेमोम) कहा जाता है।
इलायची के प्रमुख प्रकार
छोटी इलायची, दूसरी बड़ी इलायची
छोटी इलायची (Green Cardamom) क्या है?
यह इलायची मिठाइयों, चाय, दूध और विभिन्न खाद्य पदार्थों में सुगंध और स्वाद को बढ़ाने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में उपयोग की जाती है। इसे आमतौर पर हरी इलायची भी कहा जाता है।
बड़ी इलायची (Black Cardamom) क्या है?
काली इलायची के नाम से बड़ी इलायची प्रसिद्ध है। इसे ब्लैक कार्डमोम (Black Cardamom) भी कहा जाता है। इसका उपयोग मसालेदार भोजन, सब्जियों और विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है, जिससे व्यंजनों का स्वाद बढ़ जाता है।
छोटी और बड़ी इलायची में अंतर
| आधार | छोटी इलायची | बड़ी इलायची |
|---|---|---|
| सामान्य नाम | छोटी या हरी इलायची | बड़ी या काली इलायची |
| इंग्लिश नाम | Green Cardamom | Black Cardamom |
| आकार | छोटी इलायची का आकार छोटा होता है। | बड़ी इलायची का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है। |
| सुगंध | छोटी इलायची अधिक मीठी और सुगंधित होती है। | बड़ी इलायची अधिक तीव्र और धुएँ जैसी सुगंध देती है। |
| उपयोग | छोटी इलायची का उपयोग मिठाई, चाय और पेय पदार्थों में किया जाता है। | बड़ी इलायची का उपयोग मसालेदार भोजन, सब्जियों और विभिन्न व्यंजन बनाने में किया जाता है। |
निष्कर्ष
छोटी और बड़ी इलायची दोनों ही सुगंधित मसाले हैं, लेकिन इनके आकार, सुगंध और उपयोग में अंतर पाया जाता है। छोटी इलायची स्वाद में मीठी और सुगंधित होने के कारण मुख्य रूप से मिठाई, चाय और पेय पदार्थों में उपयोग की जाती है, जबकि बड़ी इलायची की सुगंध अधिक तीव्र और धुएँ जैसी होती है, इसलिए इसका उपयोग मसालेदार भोजन और विभिन्न व्यंजनों में अधिक किया जाता है। इस प्रकार, दोनों इलायची अपने-अपने गुणों और उपयोग के कारण महत्वपूर्ण हैं।
आयुर्वेद में इलायची का महत्व
इलायची का आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण उपयोग है। इसे दीपन, पाचन, रुचिकर और सुगंधिद्रव्य के रूप में जाना जाता है। भोजन में स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए भी इलायची का बहुत ही महत्वपूर्ण प्रयोग किया जाता है।
आयुर्वेद में इलायची मुख्यतः दो प्रकार की होती है, जिसका हमने वर्णन पहले ऊपर कर दिया है—छोटी इलायची और बड़ी इलायची।
इलायची को दीपन और पाचन गुणों के कारण पाचन तंत्र के लिए बहुत ही उपयोगी माना गया है, क्योंकि यह भोजन के प्रति हमारी रुचि बढ़ाती है। भोजन के बाद इलायची का सेवन करने से मुँह की दुर्गंध कम होती है और मुख में सुगंध बनाए रखने के लिए भी इसका उपयोग सामान्यतः किया जाता है।
इलायची का प्रयोग अरुचि की स्थिति में भी किया जाता है। इसकी सुगंध और स्वाद भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न करने में सहायक माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद में इसका उपयोग गैस और पेट से संबंधित कुछ सामान्य समस्याओं में भी किया जाता है।
इलायची को कफ से संबंधित विकारों में भी उपयोगी माना जाता है। इसकी सुगंधित प्रकृति के कारण यह श्वसन मार्ग से संबंधित समस्याओं में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक योगों का एक हिस्सा होती है। आयुर्वेदिक औषधियों में इसे अन्य द्रव्यों के साथ मिलाकर भी प्रयोग में लिया जाता है।
भोजन और पेय पदार्थों में उपयोग
इलायची का सबसे सामान्य उपयोग भोजन और पेय पदार्थों में किया जाता है। जैसा कि हमने ऊपर इसके बारे में विस्तार से समझा, चाय, दूध, खीर, मिठाई और विभिन्न प्रकार के पकवानों में इसका उपयोग स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इलायची के प्रमुख गुण और कर्म
गुण: रुक्ष, लघु, तीक्ष्ण, सुगंधित।
कर्म: दीपनीय, पाचनीय, रुचिकर, वात-कफ शामक, मुखशोधक, हृद्य, ग्राही, श्वास-कास में उपयोगी, अरुचि और अजीर्ण में उपयोगी।
इलायची का उपयोग किन समस्याओं में किया जाता है?
इलायची एक सुगंधित द्रव्य है, इसलिए इसका उपयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है, चाहे वह विभिन्न योगों के रूप में हो या इसका अकेले सेवन किया जाए।
- अरुचि और भोजन में रुचि बढ़ाने के लिए इलायची का उपयोग किया जाता है।
- अजीर्ण और पाचन संबंधी समस्याओं में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- भूख कम लगने पर यह भोजन में रुचि बढ़ाने में सहायक होती है।
- मुख की दुर्गंध तथा मुख की असुविधाओं को दूर करने में भी इलायची का उपयोग किया जाता है।
- श्वास और खाँसी में यह फायदेमंद है।
- हृदय संबंधी कमजोरियों में यह सहायक के रूप में काम आती है।
- अपच एवं गैस जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में भी इसका उपयोग किया जाता है।
- भोजन के बाद भारीपन और असुविधा होने पर इसे मुँह में लेने से भोजन के पाचन में सहायता मिलती है और मुख में दुर्गंध भी नहीं आती।
- इसलिए आयुर्वेद में इलायची को विशेष रूप से दीपन, पाचन, रुचिकर, मुखशोधक तथा वात-कफ शामक द्रव्य के रूप में प्रयोग में लिया जाता है।
इलायची की तासीर गरम है या ठंडी?
आयुर्वेद में इलायची एक सुगंधित, रुचिकर और पाचन में सहायता करने वाला द्रव्य माना गया है। इसलिए हमें यह भी देखना होता है कि इलायची की जो तासीर है, वह किस तरह की है।
छोटी इलायची की तासीर
इसमें जो छोटी इलायची है, उसकी तासीर शीतल अथवा ठंडी मानी गई है, क्योंकि इसका उपयोग अजीर्ण, अरुचि, मंदाग्नि, मुख की दुर्गंध जैसी परिस्थितियों में किया जाता है। छोटी इलायची का प्रयोग दूध, चाय, मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में सुगंध और स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है और इसकी तासीर ठंडी ही है।
बड़ी इलायची की तासीर
बड़ी इलायची की तासीर अपेक्षाकृत उष्ण अथवा गरम मानी जाती है। इसमें तीक्ष्णता और सुगंध के कारण इसका प्रयोग मुख्यतः पाचन और कफ-वात संबंधी विकारों में किया जाता है।
तासीर के रूप में हम इस प्रकार से कह सकते हैं कि छोटी इलायची की तासीर ठंडी, जबकि बड़ी इलायची की तासीर उष्ण है। इसलिए दोनों इलायची को केवल एक ही प्रकार की तासीर वाला मानना उचित नहीं है।
और रही बात इनके सेवन की मात्रा की, तो हमें चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही इनके सेवन की मात्रा को कम-ज्यादा करना चाहिए।
रात को सोने से पहले इलायची खाने के फायदे
आमतौर पर हम यह देखते हैं कि आदमी के मुँह से दुर्गंध आती है और कभी-कभी उसे गैस की समस्या, भोजन के पाचन में परेशानी और अरुचि जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं। तो अगर आप एक इलायची को मुँह में रखते हैं, तो उससे आपके मुँह की दुर्गंध कम होगी, भोजन के पाचन में सहायता मिलेगी और भोजन खाने के बाद जो हमें भारीपन जैसा लगता है, वह भी नहीं लगेगा। गैस और अपच में भी यह फायदेमंद है और मुँह को ताजगी प्रदान करती है। इसलिए रात को एक इलायची खाने के बहुत फायदे हैं।
असली और नकली इलायची की पहचान
हम इलायची की पहचान उसके रंग, आकार, सुगंध, स्वाद और बीजों से कर सकते हैं, क्योंकि इलायची के जो बीज होते हैं, वे गहरे भूरे रंग के दिखाई देते हैं और काले रंग के ये बीज होते हैं। इलायची को दबाने पर उसकी मजबूती हमें महसूस होती है और उसके छिलके बहुत अधिक कमजोर या बिखरे हुए नहीं होते हैं। इसलिए हम इलायची को आसानी से पहचान सकते हैं।
साथ ही, नकली या खराब गुणवत्ता वाली इलायची में अक्सर सुगंध या तो कम आएगी या बहुत ही असामान्य रूप से होगी। उसका रंग बहुत अधिक चमकीला हो सकता है और बीजों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। इसलिए इलायची खरीदते समय बहुत अधिक चमकीले रंग वाली या असामान्य गंध वाली इलायची से हमें सावधान रहना चाहिए।
इलायची इतनी महंगी क्यों है?
इलायची एक महंगा मसाला है, क्योंकि इसे उत्पादन करने और प्राप्त करने तक बहुत ही मेहनत लगती है और यह उत्पादन लागत को बढ़ाने वाली है। इसलिए इसकी फसल को विशेष जलवायु और उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता भी होती है।
इलायची के पौधों की देखभाल, फलियों की तुड़ाई और उसके बाद की प्रक्रिया में काफी मेहनत लगती है, जिसकी वजह से इसकी लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, इलायची की मांग अधिक है और उत्पादन कम मात्रा में है, जिसकी वजह से इसकी कीमत अधिक रहती है।
साथ ही, गुणवत्ता, मौसम, उत्पादन और बाजार की मांग के अनुसार इलायची की कीमत में बदलाव होते रहते हैं। यानी डिमांड और सप्लाई का खेल इस पर भी लागू होता है।
इलायची से जुड़े महत्वपूर्ण MCQ
1. छोटी इलायची का वानस्पतिक नाम क्या है?
(A) Elettaria Cardamomum
(B) Amomum Subulatum
(C) Zingiber officinale
(D) Piper nigrum
[A]
Zingiber officinale अदरक का Latin Name है।
Piper nigrum काली मिर्च का Latin Name है।
Amomum Subulatum बड़ी इलायची का Latin Name है।
2. इलायची की family निम्नलिखित में से कौन सी है?
(A) Myrtaceae
(B) Lauraceae
(C) Zingiberaceae
(D) Apiaceae
[C]
Myrtaceae family – लौंग, अमरूद, जामुन और यूकेलिप्टस।
Lauraceae – दालचीनी, तेजपत्ता, कपूर, वनीला।
Apiaceae – अजवाइन, जीरा, धनिया, सौंफ आदि।
3) आयुर्वेद के अनुसार छोटी इलायची के रस है? (A) कटु (B) मधुर व कटु (C) कषाय, तिक्त (D) अम्ल, लवण [B]
4) छोटी इलायची का वीर्य है? (A) उष्ण (B) शीत (C) अनुष्णशीत (D) रूक्ष [B]
5) बड़ी इलायची का वीर्य है? (A) उष्ण (B) शीत (C) कफाय (D) मधुर [A]
6) इलायची को English में क्या कहते है? (A) Cinnamon (B) Clove (C) Cardamom (D) Coriander [C] – Cinnamon – दालचीनी, Clove- लौंग, Coriander- धनिया
7) इलायची का गुण/विपाक कौनसा है? (A) गुरु (B) लघु (C) कटु व शीत (D) स्थूल [C]
8) Green Gold के नाम से किसे जाना जाता है? (A) काली मिर्च (B) छोटी इलायची (C) लौंग (D) केसर [B]
9) आयुर्वेद में इलायची का कर्म क्या है? (A) मुखशोधक, रोचन, दीपन (B) विरेचन (C) निद्राकारक (D) रक्तवर्धक [A]
One Liner Important Elachi Amrit se
1) सूक्ष्मैला, उपकुंचिका, द्राविडी ये सब भावप्रकाश निघंटु के अनुसार एला यानि इलायची के पर्याय हैं।
2) भारत में छोटी इलायची का उत्पादन केरल में होता है।
3) इलायची वात और कफ दोष को शांत करती है।
4) छोटी इलायची का विपाक मधुर है।
✍️ Lekhak: Ayurved Study Hub Research Team
Rajasthan se, 6+ saal ka Ayurved field research anubhav. 150+ jadi-bootiyon ki swayam pehchan.
📖 Reference: Charak Samhita, Bhavprakash Nighantu
⚠️ Disclaimer: Yah lekh keval shiksha ke liye hai. Kisi bhi aushadhi ka sevan karne se pehle apne Vaidya se paramarsh jarur le.


